Grandma’s tales

हमेशा से बच्चों को दादी या नानी कहानियां सुनाती हैं… अब जब मेरे लिए दोनों ही यहाँ नहीं हैं , तो आज मैं आपको उनकी कहानियां सुनाती हूँ.

बचपन से मैंने दोनों दादी और नानी को बोहोत परेशां किया है, ऐसे ही कुछ किस्से आज मैं यहाँ लिखने वाली हूँ.

I. नानी का पहला किस्सा – जब मैं बोहोत छोटी होती थी, पेट दर्द होने पर नानी मेरे लिए सौंफ का पानी बनती थीं, जो बोहोत मीठा होता था…. कईं बार, सिर्फ वो पीने के लिए, मैं पेट दर्द का नाटक करती थी… वो अलग बात है की वो थीं तो मेरी नानी, पकड़ लेती थीं मेरा झूठ, तो फिर वो बोहोत कम बनती थीं, जिससे मैं ज्यादा ना मांग पायुं.

II. दादी का पहला किस्सा – मुझे बचपन से मीठा का बोहोत शौक है, ख़ास कर के बताशा और किशमिश. ये दोनों ही हमारे घर में रोज़ पूजा के प्रशाद में चढ़ते थे. मैं रोज़ पूजा में बैठती थी ये दोनों चीजें खाने के लिए. जब पूजा ख़तम हो जाती थी, तो दादी मुझे प्रशाद वाली कटोरी दे देतीं थी, सबको प्रशाद बांटने के लिए. मैं हमेशा एक दो बताशे के कईं टुकड़े कर के कटोरी में रख देती थी ऊपर ऊपर. जब सब लोग उन् टुकड़ों को ले लेते थे, तब मैं बैठे के बाकी कटोरी भर खाती थी. मुझे रोज़ दादी से इस बात की डांट पड़ती थी, पर मैं रोज़ ये करती थी.

III. नानी का दूसरा किस्सा – जब मैं छोटी थी तो बोहोत बार नानी के विद्यार्थियों को शाम को tuition पढ़ाती थी, और उन्हें shortcuts सिखाती थी, नानी हमेशा मुझे इसके लिए मन करतीं थी पर मैं कौनसा सुनती थी. फिर एक बार एक बच्चे ने इन्तेहान में अच्छा नहीं किया, तब मुझे नानी से बोहोत डांट पड़ी और मैंने फिर ये शैतानी बंद करी.

IV. दादी का दूसरा किस्सा – दादी बोहोत अच्छी पहेलियाँ बनती थीं, और हमेशा मुझसे पूछतीं थीं. एक दिन बचपन में, कुछ ऐसा हुआ की, मैंने दादी से कहा की अब आप मुझे अपनी copy दीजिये, मैं पुचुंगी. दादी से copy लेने के बाद, मैंने जब पूछना शुरू किया तो उन्होंने सारे जवाब दे दिए. मैंने गुस्से में उस copy में लिखे फ़ोन number पे फ़ोन किया, ये सोच कर की वो पहेली लिखने वाले का number है. वो नंबर दादी की किसी दोस्त का था. मैंने phone पे उन्हें डांट दिया और बाद में दादी से खूब डांट पड़ी.

V. दोनों का एक किस्सा – जब मैं बोहोत छोटी थी तब दोनों नानी और दादी का घर इलाहाबाद में ही था. जब मैं नानी के यहाँ होती और कोई शैतानी करती तो नानी मम्मी को कहती की “इस्पे यहाँ मत गुस्सा करो, अपने ससुराल जाके करना”, और दादी के यहाँ दादी कहती थी “इस्पे यहाँ मत गुस्सा करो, अपने माइके जाके करना”. मम्मी बेचारी को मुझे रास्ते की रिक्शा में डांटना पड़ता था.

आप दोनों की बोहोत याद आती है, जहाँ भी हैं, खुश रहिएगा.
jojo

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4 thoughts on “Grandma’s tales

  1. so you got gussa on the wya to either of the place ha ha ha 🙂 beautiful .. Thanks for sharing yes wherever they are they are looking at you … and may they rest in peace ..

    god bless you , I know how the feeling is luckily both my grandmothers are alive.. but sadly my grandfathers are no more so I ca nunderstand the missing part so much …

    Take care and keep smiling I am sure Dadi and Nani would be so very happy seeing you smiling and doing well in life …

    Bikram’s

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