:) – Guest Post by Harshit

Jojo
जीवन की यह  जो डगरिया..
कभी बीच बजरिया…
कभी कड़ी दुपहरिया…
कभी बीच बाजार…
कभी अकेला संसार…!
हो जो कभी व्यथित…
ओ जोजो पथिक…
तुम रुकना ज़रा, ठहरना ज़रा…
जग की इस तेज़ी में…
इस मूढ़ आपा-धापी में…
खुद से दूर न हो जाना…!
खुद को देना, घडी – दो घडी…
सुखमय होगी वो बड़ी…
कोशिश करना…
खुद की सुनना…
सच कहता  है वोह…
तन के, बाएं कोने में…
रहता  है जो.
फिर भी न मिले जो हल…
सुनना उसकी जो है एक अकेली…
तुम्हारी सच्ची  सहेली…
कहते जिसको सब शैली…!
फिर जो दमको तुम…
फिर जो चमको तुम…
वोह सब भी चमके-दमके…
जोजो तुमसे जुड़े…
जिस भी, किसी  शैली में …!!
जोजो के मन को….
उससे  बेहतर  जाने…
सुन्दर है जिसके मायने…
बात जो वोह कहे…
तुमको भी खूब दिखे…!
देखो जो तुम…
दो अंखियों के झरोके से…
उन नज़र के गलियारों में…
स्पष्ट सत्य झलकेगा…
फिर तुम पर वोह दमकेगा…
फिर जो तुम दमको…
फिर को तुम चमको…
फिर वोह भी चमके – दमके…
जोजो तुमसे जुड़े…
जिस भी शैली में…!!

http://harshitnandan.blogspot.com/

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2 thoughts on “:) – Guest Post by Harshit

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